Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 54, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
या यथा चित्प्रकचिता प्रतिपक्षविदं विना ।
न सा ततः प्रचलति वेदनाभ्यासतः स्वयम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जीवननियति का मरणनियति से जो विपयसि है, उसके सभी को दिखाई देने से कहती है ।
जीवननियम का मरणनियम से जो विपयसि है, उसके सिवा जो चिति जहाँ जिस प्रकार
आविर्भूत हुई हे, वह अभ्यासवश दृढ प्रतीति होने के कारण स्वयं विचलित नहीं होती यानी
ज्यों-की-त्यों बनी रहती है