Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 53, Verses 19–20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 53, verses 19–20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 19,20
संस्कृत श्लोक
मुखमालोक्य सा तस्य स्वभर्तुः शवरूपिणः ।
इदं बुद्धवती सत्यं प्रतिभावशतः स्वतः ॥ १९ ॥
अयं स भर्ता संग्रामे निहतो मम सिन्धुना ।
वीरलोकानिमान्प्राप्य क्षणं शेते यथासुखम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
शवरूपी अपने पति का मुख
देखकर लीला ने अपने तर्क से उसे सत्य समझा । संग्राम में सिन्धु के हाथ से मारा गया वह मेरा
स्वामी वीरों को प्राप्त होनेवाले इन लोकों में पहुँचकर क्षण भर के लिए आराम से सोता
है