Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 53, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 53, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
स्वचित्तमात्रदेहैषा स्वसंकल्पस्वभावजम् ।
अन्तरेवानुभवति किलैवं नाम विभ्रमम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
लीला का यह गमन केवल उसकी मन की कल्पना ही थी, इसका स्मरण कराते हैं।
संकल्पमात्रदेहवाली लीला को अपने संकल्प के स्वभाव से उत्पन्न इस प्रकार के गमनरूप
भ्रम का अपने अन्दर ही अनुभव करती है