Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 51, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 51, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
अथ शेमुर्निमेषेण देशोपप्लवविभ्रमाः ।
प्रशान्तोत्पातपवनाः पदार्थावृत्तयो यथा ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
नियम बनने के उपरान्त पलक भर में, देश में उपद्रव के बादलों की जो घटा छाई थी, वह
उत्पात वायु (अंधड-बवंडर) के समाप्त होने पर जैसे वायु के जोर से होनेवाले तृण, पत्ते और
धूल का घूमना शान्त हो जाता है, वैसे ही सब शान्त हो गई