Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 5, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 5, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
नियतिर्देशकालौ च चलनं स्पन्दनं क्रिया ।
इति येन गताः सत्तां सर्वसत्तातिगामिना ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
नियति अर्थात् सृष्टि के अवसर
में अवश्य ही सृष्टि होनी चाहिए ओर प्रलय के अवसर में अवश्य ही प्रलय होना चाहिए इत्यादि
नियम, उक्त नियम के अवच्छेदक देश और काल, उचित देश और काल में बोने पर बीजादि
के अन्तर्गत कार्य का बीज के फूलने से चलन, बीज फोड़कर अंकुर आदि के निर्गमन द्वारा
स्पन्दन और तदुपरान्त तना, शाखा, टहनियाँ, पत्ते आदि क्रमसे फलपर्यन्त जो जो व्यापार
होते हैं वह सब क्रियाशब्दवाच्य हैं । इस क्रम से सम्पूर्ण पदार्थ जगत् से विलक्षण सत्तावाले
(पारमार्थिक सत्तावाले) जिससे व्यावहारिक क्रिया करने में क्षमता को प्राप्त हुए हैँ