Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 49, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 49, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
गिरीनपश्यन्नभसः पततः पत्रवर्णवत् ।
सिन्धुः सिन्धुरिवोत्पक्षान्मैनाकादीनितस्ततः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे सागर ने प्राचीन कालमें अपने ऊपर इधर-उधर उड़ते
हुए पंखवाले मैनाक आदि पर्वतों को देखा था, वैसे ही राजा सिन्धु ने आकाश से पत्ते के तुल्य
गिर रहे पर्वतों को देखा