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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verses 9–10

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, verses 9–10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 9,10

संस्कृत श्लोक

प्रचण्डपवनोद्धूतात्पुष्पाणीव महातरोः । अयःपिण्डादिवोत्तप्तात्ताडितात्कणपङ्कयः ॥ ९ ॥ धारा वर्षमुच इव सीकरा इव निर्झरात् । तत्पुराग्निमहादाहात्स्फुलिङ्गा इव भासुराः ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

विदूरथ से वे ऐसे निकलते थे, जैसे आँधी से खूब हिलाये गये महावृक्ष से फूल गिरते हैं, जैसे खूब तपाये गये और पीटे गये लोहपिण्डों से चिनगारियाँ निकलती हैं, जैसे वृष्टि करनेवाले मेघ से धाराएँ निकलती हैं, जैसे झरने से जलकण निकलते हैं और जैसे उसके नगर में पूर्वोक्त अग्नि महादाह से चमकदार चिनगारियाँ निकले