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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, Verses 69–70

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 48, verses 69–70 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 69,70

संस्कृत श्लोक

हेतिभारवराः सिन्धोश्चक्ररक्षास्ततोऽम्भसा । तृणानीव गताः प्रोह्य रथश्चास्याभवत्प्लुतः ॥ ६९ ॥ एतस्मिन्नन्तरे सिन्धुरस्त्रं सस्मार शोषणम् । आपत्त्राणकरं दैवं ददौ च शररूपिणम् ॥ ७० ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर जल से राजा सिन्धु के अपनी सेना की रक्षा करनेवाले अरत्रशरत्र समूह और श्रेष्ठ योद्धा तिनको की नाई बह चले ओर राजा सिन्धु का रथ भी जलप्रवाह में तैरने लगा । इसी बीच राजा सिन्धु को शोषणास्त्र का स्मरण हुआ । उसने आपत्ति से वचानेवाले तथा देव से प्राप्त शररूपी शोषणास्त्र का धनुष में सन्धान किया