Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 47, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 47, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
प्रतिभारूपिणी तेन बाले मुक्तो भविष्यति ।
एतदीयः स्वयं शत्रुः सिन्धुर्नाम महीपतिः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
बाले से अप्रबुद्ध लीला को सम्बोधन किया गया है । प्रबुद्ध लीला को बाले“ से सम्बोधन
सम्भव नहीं है क्योंकि लीला प्रबुद्ध हो चुकी हे ।
राजा विदूरथ का शत्रु जो सिन्धुनामक राजा है, उसने स्वयम् "मेँ जय से शत्रु को पीडित
करू“ इस संकल्प से मेरी पूजा की थी