Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 46, Verses 7–9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 46, verses 7–9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 7-9
संस्कृत श्लोक
सुग्रीवैर्लक्षणोपेतैः प्रशस्तैः प्रचलैः कृशैः ।
जवोड्डयनवेगेन प्रवहद्भिः सुरानिव ॥ ७ ॥
वायुं जवेन सहसा असहद्भिर्गतिक्रमैः ।
प्रोह्यद्भिरिव पश्चार्धमापिबद्भिरिवाम्बरम् ॥ ८ ॥
योजितैरिव संपूर्णैश्चन्द्रैश्चामरदीप्तिभिः ।
अश्वैरष्टभिराबद्धमाशापूरकहेषितैः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
सम्पूर्ण पूनम के चन्द्र के समान चँवरों की कान्ति से युक्त थे और अपनी हिनहिनाहट से
दिशाओं के अन्तराल को पूर्ण कर रहे थे