Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 46, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 46, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
अथोदपतदादित्यपथपीवररोधकम् ।
रजोनिभेन भूपीठमम्बरोड्डयनोन्मुखम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, तदनन्तर
अतिस्थूल बन कर आदित्य के मार्ग को ढोकने की इच्छा करनेवाला भूमण्डल ही धूलि के
वेष से आकाश में उड़ने को तत्पर होकर उठा यानी आकाशमें घनी धूलि छा गई