Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 45, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 45, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
तपो वा देवता वापि भूत्वा स्यैव चिदन्यथा ।
फलं ददात्यथ स्वैरं नभःफलनिपातवत् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
अपनी चित्-शक्ति ही तपस्या बन कर या देवता का रूप धारण कर स्वेच्छा से आकाश से
फल गिरने की नाई (मिथ्यारूप) फल देती है