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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 44, Verse 15

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 44, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

प्रबुद्धलीलोवाच । किमिदं देवि हे ब्रूहि कस्मादियमहं स्थिता । या साऽभवमहं पूर्वं कथं सेयमहं स्थिता ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रबुद्ध लीला ने कहा : हे देवी, जो मैं हूँ, वही यह कैसे ? जो मैं युवावस्था में थी वही मैं इस रूप में कैसे स्थित हूँ ? इसमें क्या रहस्य है यह कृपाकर मुझसे किये । भाव यह है कि मैं अपने आपसे भिन्न नहीं हो सकती ओर अतीत अवस्था की स्थिति का भी सम्भव नहीं हे, फिर यह अघटित घटना कैसे ?