Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 43, Verse 35
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 43, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
हा हा हागच्छ ते शीघ्रमेतदङ्गारमन्दिरम् ।
इतः प्रवृत्तं पतितुं सुमेरुः प्रलये यथा ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
जल्दी निकलो, तुम्हारा अगार की नाई जला हुआ यह घर, प्रलयकाल
में सुमेरु की नाई अपने स्थान से गिरने के लिए तैयार है