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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 40, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

रोधितोऽहमनेनेति न माम्यत्रेति यस्य धीः । अनुभूतानुभवती भवतीत्यनुभूयते ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

इस शरीर ने मुझे यहाँ प्रवेश करने से रोक दिया, अतः इस छिद्र में मैं नहीं समा सकता, क्योंकि मनुष्य शरीर का स्वभाव ऐसा ही है जिसकी ऐसी बुद्धि पैनी आत्मा को स्थूल देह स्वरूप समझती है, वह अगमन का ही अनुभव करता है