Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 36, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 36, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
पञ्जरः पञ्जरेणेव गजौघेन गजोच्चयः ।
सवनः सवनेनाद्रिरद्रिणेवामिलद्वलात् ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे पंजर पंजर के साथ मिलता है, हाथियों का झुण्ड हाथियों के झुण्ड के साथ
बड़े वेग से मिलता है, जैसे वन से युक्त पर्वत वन युक्त अन्य पर्वत के साथ मिलता है, वैसे ही
दोनों पक्षों के वीर परस्पर बड़े वेग से मिले