Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 35, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 35, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
शूलासिचक्रशरशक्तिगदाभुशुण्डीप्रासादयो विदलनेन मिथो ध्वनन्तः ।
दीप्ता अधुर्दशदिशः शतशो भ्रमन्तः कल्पान्तवातपरिवृत्तपदार्थलीलाम् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
परस्पर एक दूसरे को काटने
से शब्द कर रहे ओर झुण्ड के साथ दसों दिशाओं में घूम रहे देदीप्यमान त्रिशूल, तलवार,
चक्र, बाण, शक्ति, गदा, तोप, भाले आदि ने प्रलयकाल के तीक्ष्ण वायु से कँपाये जा रहे
(झकझोरों के साथ हिलाये जा रहे) पत्थर, वृक्ष, शस्त्र आदि पदार्थो के विलास को धारण
किया