Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 34, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 34, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
निगिरत्यागताः सेनाः स्रवन्तीरिव सागरः ।
समत्स्यमकरव्यूहा अहो नु विषमो भटः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
अहो, यह
विक्रान्त योद्धा, जैसे सागर मत्स्य और मगर के समूहों से युक्त नदियों को निगल जाता है
वैसे ही मत्स्याकार और मकराकार व्यूहवाली सन्मुख आई हुई सेनाओं को निगलता है