Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 34, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 34, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
सद्यश्छिन्नशिरश्वभ्रमज्जत्कङ्ककुलाकुलाः ।
कबन्धाः परिनृत्यन्ति तालोत्ताला रणाङ्गणे ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
देखिये, तुरन्त कटे हुए
कण्ठच्छिद्रों में डुबकी लगा रहे सफेद चीलों से व्याप्त, युद्ध के बाजे के ताल से उछल रहे
कबन्ध रणभूमि में नाच रहे हैं