Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 34, Verses 10–11

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 34, verses 10–11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 10,11

संस्कृत श्लोक

प्रत्यनीकं भिनत्त्यन्तः कुठारैः कठिनैरियम् । सेना ग्राम्येव वनिता दयितं दृष्टिचेष्टितैः ॥ १० ॥ हा पितुर्मम भल्लेन शिरो ज्वलितकुण्डलम् । सूर्यस्य निकटं नीतं कालेनेवाष्टमो ग्रहः ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रतिपक्षी सेना को काट रही हे । खेद है, मेरे पिताजी का देदीप्यमान कुण्डल से युक्त सिर भाले से काल के अष्टग्रह की नाई सूर्य के निकट भेज दिया गया है