Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 27, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 27, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
श्रीसरस्वत्युवाच ।
ज्ञेयं ज्ञातमशेषेण दृष्टादृष्टार्थसंविदः ।
ईदृशीयं ब्रह्मसत्ता किमन्यद्वद पृच्छसि ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी प्रसगतः बीच में आई हुई शंका का समाधान कर प्रस्तुत कथा को कहते हैं।
श्रीसरस्वतीजी ने कहा : भद्रे, तुमने ज्ञातव्य वस्तु सम्पूर्णतया जान ली हे, द्रष्टव्य पदार्थ
देख लिये हैं, इस प्रकार की यह ब्रह्मसत्ता है । बताओ, अब और क्या तुम पूछती हो २