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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 22, Verse 28

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 22, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

सर्गादावेव नोत्पन्नं दृश्यं नास्त्येव तत्सदा । इदं जगदहं चेति बोधाभ्यास उदाहृतः ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

कालों में दृश्य के बाध ज्ञान की आवृत्ति भी ब्रह्माभ्यास है, ऐसा कहती है । यह जगत्‌ है, यह मैं हू" इत्याकरक दृश्य सृष्टि आदि में उत्पन्न ही नहीं हुई, अतः वह सदा है ही नहीं, यह ज्ञानाभ्यास कहा गया है