Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 21, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
नानुभूतेऽनुभूतत्वसंविदन्तरुदेत्यपि ।
स्वप्नभ्रमादावन्यस्मिन्पितरीव पितुः स्मृतिः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
जो अनुभव में नहीं आया है, उसमें अनुभूतत्व भ्रान्ति कहाँ देखी गई है ? इस पर कहते हैं ।
अननुभूत में (जो अनुभव में आरुढ नहीं हुआ है, उसमें) इसका हमने अनुभव किया,
ऐसी प्रतीति अन्तःकरण में होती है, जैसे कि स्वप्न और भ्रमदशा में अन्य के पिता में ये मेरे
पिता हैं ऐसी स्मृति होती है