Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 18, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 18, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
लीलोवाच ।
स्मृत्याकाशमयः सर्गो यथा भर्तुर्ममोदितः ।
तथैवेममहं मन्ये स सर्गोऽत्र निदर्शनम् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त बात पर विचार कर लीला जान गई, अतः देवी के आशय के अनुसार बोली ।
लीला ने कहा : हे देवी, जैसे आपने मेरे पतिकी सृष्टि को भी स्मृत्याकाशमय कहा है,
वैसे ही मैं इस सर्ग को भी स्मृत्याकाशमय समझती हूँ, इससर्ग की स्मृत्याकाशमयता में वह
(समाधि में दृष्ट) सर्ग दृष्टान्त है