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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 18, Verse 24

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 18, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

लीलोवाच । स्मृतिः सा देवि मद्भर्तुस्तथा स्फारत्वमागता । स्मृतिस्तत्कारणं वेद्मि सर्गोऽयमिति निश्चयः ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

सत्यरूप इस सृष्टि के अनुभव से जनित संस्कार से पैदा हुए पुरोवर्ति विषय रहित स्मृतितुल्य स्वप्न के सदुश मेरे पति की सृष्टि हो, यों अन्य प्रकार से लीला विलक्षणताकी शंका करती है। लीला ने कहा : हे देवी, मेरे पति की वह (पूर्व के अनुभव से जनित संस्कार से पैदा हुई) स्मृति ही इस प्रकार वृद्धि को प्राप्त हुई कि वह स्मृति ही इस सृष्टिकी कारण है, उसी से यह सर्ग हुआ है, ऐसा मेरा निश्चय है