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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 18, Verse 22

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 18, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

गतं चेदित उड्डीय कुतः स्यादिह भूतलम् । सहकारीणि कानीव कारणान्यत्र कारणे ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

यहाँ की भूमि आदि से वहाँ की भूमि आदि की उत्पत्ति हो, ऐसी शंका होने पर कहती है । यदि भूतल आदि यहाँ से उड़कर वहाँ गया है, तो यहाँ भूतल कैसे रहेगा ? वहाँ गये बिना कार्य उत्पन्न नहीं हो सकता है और इसको कारण मानने पर भी सहकारी कारण कौन हँ अर्थात्‌ कोई नहीं है