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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 15, Verse 13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 15, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

तस्मादचेत्यचिदूपं जगद्व्योमेव केवलम् । शून्यौ व्योमजगच्छब्दौ पर्यायौ विद्धि चिन्मयौ ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

इस कथन से यह निष्कर्ष निकला कि अचेत्य (चेत्यभिन्न) चिद्रूप यह जगत्‌ केवल व्योम (आकाश) ही है। चिन्मय व्योम ओर जगत्‌ शब्द पर्यायवाची हैं । इनका चित्‌ से अतिरिक्त कोई अर्थ नहीं हे