Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 14, Verse 33
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 14, verse 33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
यस्या जीवाभिधानायाः शक्त्यपेक्षा फलत्यसौ ।
प्रधानशक्तिनियमानुष्ठानेन विना न तु ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस जीव की (महर्षि आदि की) इच्छा
कार्य को उत्पन्न करती है, वह प्रधान शक्ति की अपेक्षा करके ही कार्य को उत्पन्न करती है,
प्रधान शक्ति के नियम के अनुष्ठान के बिना कार्य की उत्पत्ति नहीं हो सकती है