Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 122 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
सम्यग्ज्ञानेनासम्यग्वासनां त्यजतः संस्मारभावनातो मनस्तनुतामेति ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
दूसरी भूमिका के विजय से तीसरी भूमिका मे अवतरण होता है, ऐसा कहते हैं ।
सम्यग् ज्ञान से असम्यग्वासना का त्याग कर रहे पुरुष का मन संसार की वासनाओं से
तनुता को प्राप्त होता है