Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 122 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
दृश्यते केवले देहे परमाणुचयः परम् ।
देशकालान्यतापत्तेर्नात्मोदेति न लीयते ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
आप बन्धुओं की
देह को शोक के योग्य कहते हैं अथवा आत्मा को ? पहला पक्ष नहीं बन सकता, क्योंकि देह के
भस्मीभूत होने पर केवल परमाणु का समूह दिखाई देता है, वह तो अचेतन होने के करण शोक
के योग्य नहीं है । दूसरा पक्ष भी ठीक नहीं है, क्योंकि यदि आत्मा नष्ट होता है ओर उदित
होता है, यह मान लिया जाय, तो उसकी सर्वव्यापकता न रहेगी तथा अन्य देश और अन्य
काल में उसके भिन्न होने की आपत्ति प्राप्त होगी, अत: आत्मा न तो मरता है और न उदित
होता है