Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 122, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 122 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
अथ तानववशादसत्ये भावनातानवमभ्यस्यति ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर वासनाओं के तनु होने के कारण पुरुष सदा ही अन्तर्मुखरूप रहने से
ब्रह्माहंभाव की वासना के बढ़ने के कारण बाह्य पदार्थों के क्रम से विस्मरण रूप भावना की
तनुता का अभ्यास करता है