Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 61
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, verse 61 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 61
संस्कृत श्लोक
यथा दृषदि नास्त्यम्बु यथाम्भस्यनलस्तथा ।
स्वात्मन्येवास्ति नो चित्तं परमात्मनि तत्कुतः ॥ ६१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे
शिला में जल नहीं है, जैसे जल में अग्नि नहीं है, वैसे ही अपनी आत्मा में (जीवात्मा में) चित्त
नहीं है, फिर वह परमात्मा में कैसे रह सकता है २।