Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
इत्याकर्ण्याङ्गनावक्त्राद्राजा विस्मयमागतः ।
मन्त्रिणां मुखमालोक्य चित्रार्पित इवाभवत् ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
उस वृद्धा के मुख से यह सुनकर
राजा अत्यन्त विस्मित हुए और मन्त्रियों के मुख को देखकर चित्रलिखित के समान स्तब्ध
हो गये