Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
विन्ध्यपुष्कससुग्रामे व्यवहारोऽयमीदृशः ।
प्रतिभासागतस्तस्य स्वप्ने पूर्वकथा यथा ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रतिभास और संवाद का पूर्वापरभाव भी कल्पनामात्र है, अतः व्यवस्थित नहीं है, इस
आशय से कहते हैं।
विन्ध्य पर्वत के चण्डालों के ग्राम में ऐसा व्यवहार (चण्डालीविवाहादि) होता है, यह बात
राजा लवण की प्रतिभा में आ गई थी। जैसे स्वप्नमें पूर्व की कथा प्रतिभा में आ जाती है