Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 121, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 121 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
प्रतिभासवशादेव सर्वो विपरिवर्तते ।
क्षणः कल्पत्वमायाति कल्पश्च भवति क्षणः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
सब पदार्थो का विपरिणाम
मन के प्रतिभास से ही होता है, इसीलिए क्षण कल्पता को प्राप्त होता है तथा कल्प क्षणता
को प्राप्त होता है