Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 12, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 12, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
तस्मादुदेष्यत्यखिला जगच्छ्रीः परमात्मनः ।
शब्दौघनिर्मितार्थौघपरिणामविसारिणः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार
वेदरूपता को प्राप्त हुए परमात्मा से, जो कि शब्दसमूह से निर्मित पदार्थसमूहरूप परिणाम
(कार्य) का विस्तार करते हैं, जगत् की उत्पत्ति होगी भाव यह कि “स भूरिति व्याहरत्
स भुवमसृजत” उसने “भूः कहा, अनन्तर पृथिवीकी सृष्टि की) “एत इति वै
प्रजापतिर्देवानसृजत असृग्रमिति मनुष्यानिन्दव इति पितृन्" (प्रजापतिने “एत” इससे
देवताओंकी, “असूग्रम्" से मनुष्योकी ओर इन्दवः" से पितरों की सृष्टि की) इत्यादि
श्रुतियों से यह प्रसिद्ध है कि वेदमे जो शब्दसमूह से सिद्ध पदार्थ हैं, उन्हीका परमात्मा
विस्तार करते हैँ