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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 12, Verse 13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 12, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

चिदहं तावती व्योमशब्दतन्मात्रभावनात् । स्वतो घनीभूय शनैः स्वतन्मात्रं भवत्यलम् ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

आकाशाहंकायोपाधि से उपहित परमात्मसत्ता ही जब सम्पूर्ण शब्दोके बीज-भूत शब्द तन्मात्र रूप बनने का संकल्प करती है, तब उसीसे शब्द तन्मात्राकी उत्पत्ति होती है, ऐसा कहते हैं । आकाश में अहन्ताबुद्धिवाली परमात्मसत्ता शब्दतन्मात्र के संकल्पसे (“मैं शब्द तन्मात्रा होऊँ” इस संकल्प से) अतिसूक्ष्म आकाशभाव से कुछ घन होकर शब्दतन्मात्रा होती है (७७)