Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 119, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 119, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 119 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
रूपं राघव नीरूपमसतश्चेन्निरूप्यते ।
तद्वन्ध्यातनयाकारगुणांस्त्वं समुदाहर ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा :
हे श्रीरामचन्द्रजी, असत् के रूपरहित रूप का यदि निरूपण किया जाता है, तो उसे आप बाँझ
के लड़के के आकार और गुणों का निरूपण कहिये । भाव यह है कि सुवर्णं में जो अँगूठीयकत्व
है वह अविचार से ही है, विचार करने पर तो वह कुछ भी नहीं है