Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 116, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 116, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 116 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
रघुकुलेन्दो श्रृणु मनःप्रशमने युक्तिं यां ज्ञात्वा स्वस्वाचारदूरे मनःसंधिरयमेष्यसि ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
मन के उच्छेद का उपाय कहने के लिए श्रीवस्िष्ठजी प्रतिज्ञा करते हैं ।
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे रघुकुलभूषण, मन के शमन के लिए आप युक्ति सुनिये, जिसको
जानकर आप अपनी इन्द्रियों के संचार के अगोचर ब्रह्ममें मनोवृत्ति धारा को प्राप्त होंगे