Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, Verse 75
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, verse 75 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 114 · श्लोक 75
संस्कृत श्लोक
तस्माद्राम परित्यज्य वासनां भवबन्धनीम् ।
सर्वरागमयीं तिष्ठ नीरागः स्फटिको यथा ॥ ७५ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए हे श्रीरामचन्द्रजी, संसाररूप बन्धन मेँ
डालनेवाली और सम्पूर्ण द्विताकाररूपी रंग से युक्त वासना को त्यागकर स्फटिक के समान
रागरहित होकर स्थित होइये