Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, Verse 71
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, verse 71 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 114 · श्लोक 71
संस्कृत श्लोक
संसारवासनाश्चेतो यदि नाम न पूरयेत् ।
तज्जाग्रत्स्वप्नसंरम्भाः किं नयेयुरिहापदम् ॥ ७१ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि यह अविद्या चित्तको संसारवासनाओं से पूर्ण
न करे, तो यहाँ जाग्रत्, स्वप्न आदि के भ्रम आत्मा को आपत्ति को प्राप्त कैसे करायें