Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 114 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
नाहं मांसं न चास्थीनि देहादन्यः परो ह्यहम् ।
इति निश्चयवानन्तः क्षीणाविद्य इहोच्यते ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
न मैं मांस हूँ, न मैं हड्डियाँ हूँ, मैं तो
देह से उत्कृष्ट कुछ और ही हूँ जिसके हृदय में ऐसा दृढ निश्चय है, वह क्षीण अविद्यावाला कहा
जाता है