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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 113, Verse 65

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 113, verse 65 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 113 · श्लोक 65

संस्कृत श्लोक

पुरुषस्य न या शक्ता सोढुमीक्षितुमप्यलम् । तया स्त्रियावरणया चित्रमन्धीकृतः पुमान् ॥ ६५ ॥

हिन्दी अर्थ

जो पुरुष के साक्षात्कार को तनिक भी सहने के लिए समर्थ नहीं है, उस आवरण करनेवाली अविद्यारूप स्त्री से पुरुष अन्धा बनाया गया है, यह बड़े अचम्भे की बात है