Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 113, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 113, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 113 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
संसारबीजकणिका यैषा विद्या रघूद्वह ।
एषा ह्यविद्यमानैव सतीव स्फारतां गता ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, जो यह संसार की बीजकणिका
अविद्या है, वह यद्यपि विद्यमान नहीं है तथापि विद्यमान -सी विशालता को प्राप्त हुई
हे