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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 112, Verse 4

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 112, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 112 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । कथमस्यातिलोलस्य वेगो वेगैककारणम् । चलता मनसो ब्रह्मन्बलतो विनिवार्यते ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्‌, अत्यन्त चंचल इस मन के तीव्र वेग का मुख्य कारण वेग का यानी चंचलता का बल से कैसे निवारण हो सकता है ?