Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 112, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 112, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 112 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
यस्मिंस्तस्मिन्पदार्थे हि येन तेन यथा तथा ।
तीव्रसंवेगसंपन्नं मनः पश्यति वाञ्छितम् ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे-जैसे प्रकर्षं से मन तीव्र वेग से युक्त होता है उस पदार्थ में उसी वेग से तत्-तत् अभिलाषा
को देखता है