Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 111, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 111, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 111 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
न शस्त्रदलनोत्पातपाता यस्यां मनागपि ।
स्वभावमात्रव्यावृत्तौ तस्यां कैव कदर्थना ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
राजलक्ष्मीरूप सुख देने वाले युद्ध में शस्त्रच्छेदनरूप क्लेश होता है, स्वर्गरूप खुख में
भरकर ऊर्ध्वगमन और वहाँ से अधःपतनरूप क्लेश होता है। मनोजयरूप युख में तो कोई भी
क्लेश नहीं है, ऐसा कहते हैं ।
जिसमें शस्त्रास्त्र से, अंगच्छेदन, उर्ध्वगमन, अधःपतन आदि कुछ भी नहीं होते, उस
स्वभावमात्र की व्यावृत्ति मेँ कोन सा क्लेश है ?