Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 110, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 110, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 110 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
पर्याकुले हि मनसि शशिनो जायतेऽशनिः ।
अमृतं विषभावेन भुक्तं याति विषक्रियाम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
मन के व्याकुल होने पर चन्द्रमा से वज की उत्पत्ति होती हे ।
अमृत ही क्यों न हो यदि यह विष है, ऐसी बुद्धिसे उसका पान किया जाय तो अवश्य विष का
कार्य मूर्च्छा, मरण आदि होता है