Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 110, Verse 51
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 110, verse 51 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 110 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
यद्यत्संवेद्यते किंचित्तेन तेनाशु भूयते ।
मनो मनननिर्माणं यथेच्छसि तथा कुरु ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
मन जिस किसी का
संकल्प करता है शीघ्र वही हो जाता है । इसलिए हे श्रीरामचन्द्रजी, स्फुरणरूप मन को आप
जैसा चाहते हैं वैसा कीजिये