Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 109, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 109, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 109 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
अनलाननिलांश्चैव भक्षकांस्तक्षकानपि ।
वञ्चयित्वा भयान्मृत्योः सदारोऽहं विनिर्गतः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
अग्नि, वायु, बाघ आदि हिंसक जीवों और सर्प
आदि की आँखों में धूल झोंककर यानी उनसे बचकर मैं मृत्यु के भय से सपत्नीक निकल
आया